ज़िन्दगी इस जंगल के तरह है शायद, अंदर कौनसा जानवर मिले पता नहीं होता, ये धूप समय के तरह है हमेशा दोपहर के तरह तपाता रहता है, हम शाम की उम्मीद में आने वाले पलों से अनजान आगे बढ़ते रहते है अगली सुबह के लिए, और ये पेड़ हमारे भगवानो के तरह है जिनसे हम फल, छाँव और सहारे की उम्मीद लगाए रहते है, लेकिन वो भगवान बस इन पेड़ों के तरह है जो ना फल देता है ना छाँव, और हम बस एक डर के साथ आगे बढ़ते रहेंगे और कभी चलते चलते कहीं सुंदर पहाड़, नदी झड़ने मिलेंगे तो हम उस पेड़ को सुक्रिया कहेंगे जिसने हमने शायद डर के अलावा कुछ दिया ही नहीं.... #writers_together #writersofinsragram #writersofig #writersofbihar #poeticprabhas #poetrycommunity #hindi #writerprabhas #god #aethist #deism #agnostism #hinduism

















