मुझे उसमें भगवान शिव दिखते हैं,
जब वो गुस्से में सारा घर
सिर पर उठा लेने वाला,
किसी की भी बात
ना मानने वाला,
मेरे आगे झुक कर सारी
शर्तें स्वीकारता है,
बिना शिकायत मेरी हर
जिद को मानता है,
वो जानता है,
मैं नासमझ हूँ थोड़ी,
इसलिए बिना कहे मेरी
हर बात जान लेता है |
कब, कहाँ, किससे, क्या
कहना है,
सब पता है उसे,
फिर भी मेरी बातें
चुपचाप सुनता है |
उसके हाथ में त्रिशूल,
सिर पर चन्द्रमा नहीं,
फिर भी अर्धनारीश्वर सा
अपनाता है मुझे |
मेरे सोलह सोमवार के व्रत सा दिखने वाला,
हर ज़हर मेरे लिए पी जाता है,
कभी एक जगह स्थिर न रहने वाला,
मेरे माथे पर वो चाँद सा ठहरता है,
शायद इसलिए मुझे उसमें अपने शिव दिखाई देते हैं |
-Gauri.











