🚩🚩जय श्री राम 🚩🚩
सब सुख लहै तुम्हारी सरना,
तुम रक्षक काहू को डरना।।
*अर्थ :- जो भी आपकी शरण में आते है उन सभी को आनन्द एवं सुख प्राप्त होता है और आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।
*गूढार्थ :- तुलसीदासजी यहाँ भगवान की शरण में जाने के लिए कह रहें।
शरणागति एक महान साधन है, भगवान की शरण जाओ, भगवान का बन जाओ, उसके बिना जीवन में आनंद नहीं है, भगवान आधार है।
गलतियों को कहने का स्थान अर्थात् भगवान।
शरणं यानी गति, भगवान ही हमारी गति हैं, भगवान को छोड़कर दूसरे किसकी शरण जायँ?













