#करवाचौथ_की_सच्चाई
किसी भी तरह का व्रत जो किसी भी इच्छा से रखा जाए, वर्जित है। शास्त्रों7 में भक्ति योग को यथायोग्य खाने, सोने एवं जागने पर सफल बताया है। सीधा अर्थ है व्रत, जागरण वर्जित क्रियाएँ हैं।
गीता अध्याय-6 श्लोक-16
https://youtu.be/Ex8EjHZdn1Y?si=KVUkFIkzpLF-Wv2s












