"डर से भागो नहीं, उसे समझो"
कभी-कभी हम किसी वस्तु, स्थिति या सिर्फ़ एक कल्पना भर से ही डर और चिंता में डूब जाते हैं।कोई विद्यार्थी सोचता है कि इस बार वह परीक्षा में फेल हो जाएगा — और यह सोच ही उसे अंदर से तोड़ देती है।कोई व्यक्ति अपने भविष्य की कल्पना कर के ही परेशान हो जाता है।पर ऐसा क्यों होता है?असल में, यह डर इसलिए जन्म लेता है क्योंकि हम अपने अंदर किसी कमी को महसूस करते हैं।हमें लगता है कि हम किसी और से कम हैं, हम सक्षम नहीं हैं, हम हार जाएंगे — और यही सोच हमें अंधेरे की ओर ले जाती है।लेकिन रुकिए —जब भविष्य हमारे हाथ में नहीं है, तो उसके बारे में बार-बार सोचना क्यों?हमें आज पर ध्यान देना चाहिए।आज कुछ करेंगे तभी तो भविष्य बनेगा।
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