By @mohammad.ali.sahil sahab. Legendary poet of this era. कोई खंजर हु न तलवार हु मैं । एक चमकता हुआ किरदार हु मैं ।। आदमयित का तलबगार हूँ मैं । लोग कहते है के बीमार हु मैं ।। तेरी महफ़िल में।जो सच बोल दिया । सब की नज़र में गुनाहगार हु मैं ।। बनके आया था मैं बाजार में आज । लोग समझे के खरीदार हु मैं ।। (at Indira Nagar, Lucknow) https://www.instagram.com/p/BtXkx8elCya0tyYOWiqb5ycuttiae1a2qq56cI0/?utm_source=ig_tumblr_share&igshid=rtynatd5g720













