DAY 6728
Jalsa, Mumbai July 22, 2026/July 23 Wed/Thu 1:20 am
" रक्त का कितना असर होता है - ये कहना कठिन - बहादुर की संतान कायर होती है, कबीर के वंश में कमाल उपजता है, पर बालपन में पड़े संस्कारोंका असर, किसी न किसी रूप में जीवन भर बना रहता है - प्रवस्तुगत भी होता है "
" अनुभूति का सत्य वस्तुगत सत्य से कहीं अधिक सजीव होता है "
~ हरिवंश राय बच्चन, " क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं " ,
आत्म कथा का पहली खंड
" की मैं कितना ही भूलूँ भटकों या भरमाओं,
है एक कहीं मंज़िल है जो मुझे बुलाती है;
कितने ही मेरे पाओं पड़ें ऊँचे नीचे,
प्रतिपल वो मेरे पास चली ही आती है !
मुझ पर विधि का अहसान बहुत सी बातों का, पर मैं कृतज्ञ हुआ इसपर सबसे ज़्यादा,
नभ ओले बरसाए , धरती शोले उगले ;
अनवरत समय की चक्की चलती जाती है "
~ हरिवंश राए बच्चन
" रात आधी हो गई है ;
जागता मैं आँख फाड़े, हाय सुधियों के सहारे,
चाँदी पिछले पहर की पास में जो सो गई है;
रात आधी हो गई है "
अमिताभ बच्चन













