मजदूरी
उसने कहा कि वह मजदूरी करके घर लौटा पर मैंने क्या किया?
शायद १५ लोगों ने ताने दिए थे,
जो जानते नहीं है उनने मेरा मज़ाक बनाया क्योंकि उन्हें मैं उनकी सहेली लगती हूं?
वहां मेरे अपने मुझसे रूठे हुए है क्योंकि मैंने उन्हें मनाया नहीं?
बिना गलती से अंजान दादी ने डाटा और मेरे चरित्र से अंजान मुझपर लांछन लगा दिया,
मेरे बारे में मेरे सामने ४ जनों ने कानाफूसी की,
पूछे बिना कि मुझे करना है या नहीं काम दे दिया,
जबरन खुश देखना चाहा कुछ ने क्योंकि मैं तो उनसे गुस्सा हूं?
पर अंजान साथी भी थे, मेरे साथ कुछ राही भी थे,
क्या मैं सचमें सहेली हूं?
क्यों मनाना जब मैंने कुछ नहीं किया तो?
गलती सच बोलने कि की थी?
तो अब मैं बोलना भी बंद कर रही हूं?
साथी ने मुझे शांत होने को कहा.. मैंने अनजाने में रेप्टा खींच दिया
देखो! मेरे साथ लड़ना है तो लड़ो नहीं तो अपनी राह बदलो,
उसने फिर कहा बताओ ना मैंने मजदूरी की और तुमने?
वो...कुछ नहीं....
मैं कहती भी क्या.. मन से मन की दूरी में सब कह जो दिया था














