क्यों इंसान तू ऐसा है, अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए, क्यों तू दूसरों की ज़िंदगी के साथ खेलता है। — क्यों तू उनका इस्तेमाल करता है, खुद के फायदे के लिए दूसरों का नुक़सान करता है। — क्या तो इंसान है या हैवान है। दूसरों को दुख पहुंचाकर, — कैसे तू चैन की नींद सो जाता है। ना तू अपना देखता है ना पराया, ना ही तू कोई निर्दोष बालक देखता है, ना ही कोई बेजुबान जानवर। — अपने हाथ दूसरों के खून से रंग कर कैसे तू खुद से नज़रे मिला पता है। — क्या इतना आसान है, किसी की जान लेना। — क्या इतना आसान है, किसी की भावनाओं के साथ खेलना। — जन्म तूने इंसान के रूप में लिया, तो शैतान कैसे बन गया तू। — इंसानियत को इतनी पीछे कैसे छोड़ आया तू। — उस खुदा से तो थोड़ा डर, नहीं तो खुद से ही डर की क्या था तू, और क्या बन गया है। — कल शायद सब कुछ होगा तेरे पास, पर ना खुशी होगी, ना सुकून होगा। — ना तेरा दुख सुनने के लिए कोई अपना होगा। — क्यों इंसान तू ऐसा है, अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए, क्यों तू दूसरों की ज़िंदगी के साथ खेलता है। . ~अंजलि — Join our community:- @lafazandaz . — Written by :- @_pouringwords . — — — #writercommunity #writersoninstagram #womens #weinspire #strongwomenquotes #poemporn #poemsofig #humanity #hindipoem #hindipoems #missingquotes #animallover #shayrana #hindistory #dilkibaat #hindipoetry #hindiwriting #hindiwriter #truequotes (at Devil) https://www.instagram.com/p/CBTCh0RF1Vb/?igshid=yh3syxcowv7j