जब शेखतकी की लड़की तेरह वर्ष की आयु की थी, तब मृत्यु हो गई थी। उसका मानव जीवन का संस्कार शेष नहीं रहा था। पशु-पक्षी का जीवन मिलना था। परमात्मा कबीर जी ने उसको कब्र से निकलवाकर जीवित किया। आयु वृद्धि की। अपनी बेटी बनाकर परवरिश की। सत्य साधना की दीक्षा देकर मुक्त किया।


















