श्रीमद्रेवीभागवत महापुराण, स्कन्ध 9, अध्याय 33 श्लोक 44-45 में लिखा है कि जो भारतवर्ष मे केशयुक्त मिट्टी से बने पार्थिव लिंग (शिवलिंग) की पूजा करता है, वह उस मृदा मे विद्यमान रजकणों की संख्या के बराबर वर्षों तक
केशकुण्ड नामक नरक में निवास करता है।
Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel ▶️












