#रेशमी_छुअन और #सुलगती_सांसें
मेरी नंगी पीठ पर जब तुम्हारी उंगलियां रेंगती हैं,
एक ठंडी सी सिहरन मेरी रूह को छू जाती है।
तुम्हारी सुलगती हुई सांसें जब तमेरी गर्दन पर ठहरती हैं,
तो मेरी धड़कनें बेकाबू होकर सब बयां कर जाती हैं।
होंठों का होंठों से वो प्यासा और गहरा टकराव,
जैसे सूखी ज़मीन पर जलती हुई शबनम का गिराव।
गले से उतरती हुई वो मदहोश कर देने वाली आहें,
और कसती चली गईं मेरे बदन पर तुम्हारी बाहें।











