कविता: समानता की गूंज
पंजाब की तालों में छिपी, दो आवाज़ों की कहानी, एक सोने की चादर में लिपटी, दूसरी संघर्ष की निशानी। जहां जाट राजा गाते हैं रेत पर महलों की बात, अपनी धरती और वीरता के गीत, संग लिए अपार सौगात, दलित सपनों का नाच नज़र आता है उनके संग, गीत हैं जो कहते उनके दर्द की, न्याय की उम्मीदों की जंग। रूप लाल की हम्मर कॉलेज के द्वार तक जाती, गिन्नी की आवाज़ उठती, उनके संगीत में वह कहानी बताती, जो इतिहास में छिपी,…











