शून्य या शिव
शून्य बिना संसार नही, शून्य बिना वेद चार नही,
शून्य सा कोई आकार नहीं, शून्य के अलावा आधार नहीं,
शून्य से श्रृष्टि, शून्य से दृष्टि,
शून्य से यज्ञ, शून्य सर्वज्ञ,
शून्य ही छंद, शून्य ही द्वंद,
शून्य ही शेष, शून्य ही द्वेष,
शून्य के बिना किसी का अंश नही,
शून्य को मिटा सके ऐसा कोई कंस नहीं,
शून्य समय का उदय है, शून्य काल का सुबह है,
शून्य ही श्राप है, शून्य ही पश्चाताप है,
शून्य का मन साफ है, शून्य ही महाकाल का लिबास है,
शून्य ही शंकर के गले में लपटा सांप है,
शून्य ही शिव के होने का आभास है ||
- अय्यारी













